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डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो को यूजीसी से अलग करने के लिए कमेटी गठित

June 19, 2014


देश का दूरस्थ शिक्षा एक बार फिर सुर्खियों में हैं. पिछले साल दूरस्थ शिक्षा परिषद को भंग दिया गया था और इसे इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी से अलग कर यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन के हवाले कर दिया गया था. जिसने दूरस्थ शिक्षा परिषद का नाम बदलकर डिस्टेंड एजुकेशन ब्यूरो कर दिया था.

अब केंद्र में नई सरकार बनने के बाद एक बार फिर तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया गया है जो इस बात पर विचार करेगी की डिस्टेंस एजुकेशन ब्यूरो को यूजीसी से अलग कर एआईसीटीई की तर्ज पर एक स्वायत्त संस्था के रुप में कैसे स्थापित किया जाए.

मंत्रालय के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस कमेटी में राजस्थान ओपन यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर को चेयरमैन और असम के कृष्णकांत हांडिक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर श्रीनाथ वरुआ और दूरस्थ शिक्षा परिषद के पूर्व डायरेक्टर रसोरिया को इसका सदस्य बनाया गया है. सरकार ने कमेटी को तीन महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा है . माधव मेनन कमेटी की रिपोर्ट में दूरस्थ शिक्षा परिषद को भंग कर एक नई बॉडी बनाने की सिफारिश की गई थी और अंतरिम व्यस्था के रुप में दूरस्थ शिक्षा हैंडल करने का अधिकार यूजीसी को देने की बात कही गई थी. कमेटी की रिपोर्ट को आधार बनाकार मंत्रालय ने 29 दिसम्बर 2012 को डीईसी को भंग कर यूजीसी के अधीन कर दिया था. बाद में मई 2013 को इग्नू ने भी एक्ट में बदलाव कर दूरस्थ शिक्षा परिषद को अलग करने की मंजूरी दे दी.

पिछले महीने संसद की स्थायी समीति ने राज्य सभा चेयरमैन को सौपे अपनी रिपोर्ट में दूरस्थ शिक्षा परिषद को भंग करने के फैसले को गंभीर मामला बताया है. रिपोर्ट में इग्नू के वाइस चांसलर प्रोफेसर असलम और मंत्रालय के कुछ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. संसद की स्थायी समीति ने बतौर वाइस चांसलर और कार्यकारी वाइस चांसलर के रुप में प्रोफेसर असलम के किए गए सभी फैसलों की जांच करने की बात कहीं है. स्थायी समीति ने वाइस चांसलर प्रोफेसर असलम की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए हैं. रिपोर्ट में दूरस्थ शिक्षा परिषद को भंग करने, यूनिवर्सिटी की कम्यूनिटी कॉलेज को खत्म करने और माधव मेनन कमेटी की रिपोर्ट को लागू नहीं करने के अलावा कोर्ट के आदेश को को नजरअंदाज करने के मुद्दे भी शामिल हैं.

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार की प्राथमिकता का खुलासा करते हुए साफ कहा है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक क्वालिटी शिक्षा पहुंचाने के लिए ऑनलाइन और डिस्टेंस माध्यम का इस्तेमाल किया जाएगा. राष्ट्रपति ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए कहा था कि सरकार मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्सेस् और वर्च्युअल कक्षाएं तैयार करेगी. उन्होंने शिक्षण संस्थाओं में गुणवत्ता, अनुसंधान और नवीन-प्रक्रिया में उत्पन्न कठिनाइयों को दूर करने के लिए एक राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनाने की बात कही थी.

अब विभागों और अधिकारियों की मनमर्जी से सवाल उठता है कि आखिर देशभर के युवाओं को शिक्षा का अवसर मुहैया कराने के मकसद में सरकार कैसे सफल हो पाएगी.

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